हिन्दी भाषा का इतिहास और विकास  

“जय हिन्द दोस्तो ”
स्वागत है आप सभी का The Guru Shala पर दोस्तों आप सभी को हिंदी दिवस की बहुत – बहुत शुभकामनाएं …. ! दोस्तों किया आपके दिमाग मै ये सवाल उठा की हिंदी भाषा कंहा से आई ? इसका असल इतिहास किया है ? तो चलिए दोस्तों जानते है हिंदी भाष के बारे मै !

हिंदी हमारे देश की राष्ट्र भाषा है ! ‘सिन्धु’ ‘सिंध’ नदी को कहते है। सिन्धु नदी के आस-पास बसा क्षेत्र सिन्धु प्रदेश कहलाता है। ईरानियों के सम्पर्क में आने से संस्कृत शब्द ‘सिन्धु’ में आकर हिन्दू या हिंद हो गया।

ईरानियों द्वारा उच्चारित किया गए इस हिंद शब्द में ईरानी भाषा का ‘एक’ प्रत्यय लगने से ‘हिन्दीक’ शब्द बना है जिसका अर्थ है ‘हिंद का’। यूनानी शब्द ‘इंडिका’ या अंग्रेजी शब्द ‘इंडिया’ इसी ‘हिन्दीक’ के ही विकसित रूप है।

इसकी शुरुआत होती है सर्वप्रथम आदिकाल से , यह काल १००० से १५०० इसवी तक रहा ! शुरुआत के दौर में हिंदी सभी भाषाओँ के बहुत निकट थी और यही से हिंदी का जन्म हुआ ! पहले आदि है। आदि अपभ्रंश में अ, आ, ई, उ, उ ऊ, ऐ, औ केवल यही आठ स्वर थे।ऋ ई, औ, स्वर इसी अवधि में हिंदी में जुड़े ।

1000 से 1100 ईसवी तक हिंदी अपभ्रंश के समीप थी साथ ही व्याकरण भी अपभ्रंश के अनुरूप ही काम करता था ! बाद में परिवर्तन होते हुए और 1500 ईसवी आते-आते हिंदी स्वतंत्र रूप से एक भाषा के रूप में सामने आई !

1460 के आस-पास देश भाषा में साहित्य सर्जन प्रारंभ हो चुका  था। इस समय इसमें दोहा, चौपाई, छप्पया दोहा, गाथा आदि छंदों में रचनाएं हुई ! गोरखनाथ, विद्यापति, नरपति नालह, चंदवरदाई, कबीर आदि इस समय के प्रमुख रचनाकार है।

इसके बाद शुरू हुआ मध्यकाल, ये वह समय था जब हिंदी में कई परिवर्तन आए ! और उस वक्त हमारा देश मुगलों के अधीन होने के कारन हिंदी भाषा पर इसका प्रभाव पड़ा ! जिसका परिणाम यह हुआ की फारसी के लगभग 3500 शब्द, अरबी के 2500 शब्द, पश्तों से 50 शब्द, तुर्की के 125 शब्द हिंदी की शब्दावली में शामिल होते गये ,

उस वक्त यूरोप से भी सम्पर्क बढ़ रहा था जिसकी वजह से पुर्तगाली, स्पेनी, फ्रांसीसी और अंग्रेजी के शब्दों का समावेश भी हिंदी में होता चला गया !अब हालात यह थे की मुगल दरबार में फारसी पढ़े-लिखे विद्वानों को नौकरियां मिली थी

परिणामस्वरूप पढ़े-लिखे लोग हिंदी की वाक्य रचना फारसी की तरह करने लग गये थे । इस अवधि तक आते-आते अपभ्रंश का पूरा प्रभाव हिंदी से समाप्त हो गया जो आंशिक रूप में जहां कहीं शेष था वह भी हिंदी की प्रकृति के अनुसार ढलकर हिंदी का ही एक भाग बन चूका था !

यह समय १५०० से १८०० इसवी तक चला ! इस काल में भक्ति का भाव अधिक रहा ! भक्ति कवियों में अनेक विद्वान भी थे जो तत्सम मुक्त भाषा का प्रयोग करते थे ! राम और कृष्ण जन्म स्थान की ब्रज भाषा में काव्य रचना की गई, जो इस काल के साहित्य की मुख्यधारा मानी जाती हैं। इस समय दखिनी हिंदी का रूप भी सामने आया।

अब पिंगल, मैथिली और खड़ी बोली आदि कई भाषायों में भी रचनाएँ हो रही थी !साथ ही इस काल के कवियों में महाकवि तुलसीदास, संत सूरदास, संत मीराबाई, मलिक मोहम्मद जायसी, बिहारी, भूषण आदि प्रमुख रहे हैं।

“रामचरित्रमानस” जैसे महान ग्रन्थ भी इसी समय लिखा गया था ! इस समय के कवियों को रामाश्रयी और कृष्णाश्रयी शाखाओं में बांटा गया था ! साथ की रीतिकालीन काव्य भी ईसिस समय लिखा गया !

इसके बाद आया आधुनिक काल, यह काल १८०० इसवी से अब तक चल रहा है ! जिसमे तब से ;लेकर अब तक अनेको [परिवर्तन आ चुके है जो की कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी है ! देश की गुलामी के वक्त अंग्रेजी का प्रभाव देश की भाषा और संस्कृति पर दिखाई देने लगा ! और साथ ही अंग्रेजी शब्दों का चलन और प्रचलन बढ़ गया !

जब मुगलों का राज्य समाप्त होने लगा तो अरबी और फारसी के शब्दों में थोड़ी गिरावट आई ! क, ख, ग ध्वनियां क, ख, ग में बदल गई। इस पूरे कालखंड को 1800 से 1850 तक और फिर 1850 से 1900 तक तथा 1900 का 1910 तक और 1950 से 2000 तक विभाजित किया जा सकता है।

बाकी का साहित्य अपभ्रंश में है इसे हिंदी की पूर्व पीठिका माना जा सकता है। आधुनिक भाषाओं का जन्म निम्न प्रकार  है :-

अपभ्रंश आधुनिक भाषाएं
मगधी बिहारी, बंगला, उड़‍िया, असमिया
शौरसेनी  पश्चिमी हिंदी, राजस्थानी, पहाड़ी , गुजराती
पैशाची लहंदा, पंजाबी
पश्चिमी हिंदी  खड़ी बोली या कौरवी, ब्रिज, हरियाणवी, बुन्देल, कन्नौजी
पूर्वी हिंदी अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
राजस्थानी पश्चिमी राजस्थानी (मारवाड़ी) पूर्वी राजस्थानी
ब्राचड सिंधी
बिहारी भोजपुरी, मागधी, मैथिली
पहाड़ी पश्चिमी पहाड़ी, मध्यवर्ती पहाड़ी (कुमाऊंनी-गढ़वाली)
महाराष्ट्री मराठी

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