ज्वार-भाटा किया है – Tide ebb

ज्वार-भाटा किया है – Tide ebb

जय हिन्द दोस्तो , स्वागत है आप सभी का The Guru Shala पर दोस्तों आज की हमारी पोस्ट ज्वारभाटा से (Tide ebb) संबंधित है तो चलिए शुरू करते है

ज्वारभाटा:➖

चन्द्रमा एवं सूर्य की आकर्षण शक्तियों के कारण सागरीये जल के ऊपर उठने तथा गिरने को ज्वारभाटा कहते हैं। सागरीये जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ाने को ज्वार (Tide) तथा सागरीये जल को नीचे गिरकर पीछे लौटने (सागर की ओर) भाटा (Ebb) कहते हैं।

ज्वारभाटा उत्पन्न होने के कारण:➖

पृथ्वी, चन्द्रमा और सूर्य की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति की क्रियाशीलता ही ज्वार-भाटा की उत्पत्ति का प्रमुख कारण हैं। चन्द्रमा का ज्वार-उत्पादक बल सूर्य की अपेक्षा दोगुना होता है क्योकी यह सूर्य की तुलना में पृथ्वी के अधिक निकट है।

पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन 12 घंटे 26 मिनट के बाद ज्वार तथा ज्वार के 6 घंटा 13 मिनट बाद भाटा आता है।

24 घन्टे में प्रत्येक स्थान पर 2 बार ज्वार-भाटा आता है-एक बार चन्द्रमा के आकर्षण से और दूसरी बार पृथ्वी के अपकेन्द्रीय बल के कारण। लेकिन इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथेम्पटन में ज्वार प्रतिदिन चार बार आते हैं।

चंद्रमा 28 दिन में पृथ्वी की परिक्रमा पूर्ण करता है 24 घंटे या 1 दिन में यह व्रत का 1/28 भाग तय कर लेता है

ज्वार-भाटा के प्रकार:➖

1.वृहत या दीर्घ ज्वार

2. लघु या निम्न ज्वार

चन्द्रमा के परिक्रमण के कारण अपने ही स्थान पर आने वाले दैनिक ज्वार प्रतिदिन 52 मिनट देरी से आते है

जब सूर्य,पृथ्वी व चन्द्रमा एक सीध में हो तो “दीर्घ ज्वार” आता है I (पूर्णिमा व अमावस्या को) यह स्थिति “युत-वियुत या सिजिगी कहलाती है


सूर्य व चन्द्रमा दोनो पृथ्वी के एक ओर होते है – युति(अमावस्या को)


जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच मे पृथ्वी होती है –वियुति(पूर्णिमा को)
(सूर्य पृथ्वी चन्द्रमा)

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सूर्य,पृथ्वी व चन्द्रमा जब समकोण पर आते है तो ” लघु ज्वार” आता है (महिने के दो दिन शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष अष्टमी को)I

ज्वार-भाटा के लाभ➖

1. ज्वार ऊर्जा के स्रोत हैं क्योंकि जल के ऊपर उठने से नीचे गिरने से ऊर्जा पर पैदा की जा सकती है फ्रांस और जापान में ज्वारीय विद्युत का उत्पादन किया जाता है

2. विश्व के बड़े बंदरगाह समंदर से दूर नदी के मुहाने पर स्थित है(लंदन,कोलकाता आदि) ज्वारीय जल के साथ जलयान भीतर तक आ पाते हैं

3. मछली पकड़ने वाले नाविक ज्वार के साथ खुले समुंदर में मछली पकड़ने जाते हैं तथा भाटा के साथ सुरक्षित तट पर लौट आते हैं

4. ज्वार भाटे की वापसी लहर समुंदर तट पर बसे नगरों की सारी गंदगी समुन्द्र में बहाकर ले जाती है

5. ज्वार भाटे की लहर वापस जाते समय कई समुद्री वस्तुएं जैसे-शंख,घोंघे आदि किनारे पर छोड़ जाती है

6. ज्वार भाटा के कारण समुद्री जल गतिशील एवं साफ रहता है तथा जल जमता नहीं है

 

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