मुद्रा स्फिति (Inflation)

जय हिन्द दोस्तो ,  स्वागत है आप सभी का The Guru Shala  पर आज हम आपको मुद्रा स्फिति (Inflation) बताने जा रहे हैं , जो की Complete Topic Wise   रहेगा जिसमे  हम  आपको  Topic  complete  होने  पर उस Topic के  Importent MCQ देगे  जिसका  आने बाले सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूंछे जाने की पूरी पूरी संभावना है ! तो आप सभी से निवेदन है कि इसे अच्छे से पढिये और याद कर लीजिये ! I

मुद्रा स्फीति की परिभाषा:

  • किसी वस्तु के मूल्य में लम्बें समय तक निरंतर होने वाली वृध्दि को मुद्रा स्फीति कहा जाता है।

मुद्रा स्फीति का प्रभाव:

  • मुद्रास्फीति में व्यक्तियों की क्रय शक्ति में घट जाती है, इसे ही हम आम भाषा में महगाई कहते है। Inflation

मुद्रास्फीति की माप: 

  • मुद्रास्फीति की माप के लिए प्रमुख दो सूचकांक निर्धारित किये गए है:
    • थोक मूल्य सूचकांक (Whole Price Index)
    • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Costumer Price Index) Inflation

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  • थोक मूल्य सूचकांक:
  • इस सूचकांक में कुछ चयनित की गई वस्तुओं के औसत मूल्य को दर्षाया जाता है।
  • भारत में थोक मूल्य सूचकांक को आधार मानकर महगाई की गणना की जाती है।
  • भारत का वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहाकार कार्यालय द्वारा प्रत्येक माह वस्तुओं के मूल्य में उतार.चढाव को मापा जाता है।
  • सूचकांक का एक आधार बर्ष होता है जो कि 05 निर्धारित किया गया है।
  • वर्तमान सूची में 676 वस्तुओं को शामिल किया गया है।
  • प्रो. अभिजीत सिंह समिति ने इस सूचकांक की अनुसंषा की थी।

 

2)    उपभोक्ता मूल्य सूचकांक:

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उपभोक्तों द्वारा खरीदें गई वस्तुओं व सेवाओें के औसत मूल्य को मापने वाला एक सूचकांक है।
  • भारत में आर्थिक विषमता के कारण जनता की क्रय शक्ति और क्रय व्यवहार समान नहीं है इसी कारण भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को चार भागों में वर्गीकृत किया गया है।

(i) औद्योगिक कामगार (Industrial Workers)

(ii) ग्रामीण श्रमिक (Rural Workers)

(iii)  कृषि श्रमिक (Agriculture Workers)

(iv) शहरी गैर.शारीरिक श्रमिक (Urban Non-Manual Workers)

  • सूचकांक के लिए 2012 को आधार बर्ष निर्धारित किया गया है।

मुद्रा अवस्फीति या संकुचन(Deflation)

मुद्रा अवस्फीति की परिभाषा:

  • जिस प्रकार मुद्रा स्फीति में वस्तुओं के मूल्य में निरंतर वृध्दि होती है उसी प्रकार मुद्रा अवस्फीति में मूल्यों में निरंतर गिरावट आती है लेकिन गिरावट बाजार में मांग एवं पूर्ति के द्वारा उत्पन्न होती है।
  • जब भी मांग से अधिक उत्पादन होने लगता है उस समय ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे वस्तु की मांग तो स्तिर होती है परन्तु पूर्ति बड़ जाती है।

Inflation

औद्योगिक नीति(Industrial Policy)

औद्योगिक नीति की परिभाषा:

  • किसी देष की औद्योगिक नीति वह नीति है जिसका उद्देष्य उस देष के निर्माण उद्योगों का विकास करना एवं उन्हें वांछित दिषा प्रदान करना होता है।

भारत की प्रमुख औद्योगिक नीति निम्न है:

1)    प्रथम औद्योगिक नीति 1948

2)    द्वितीय औद्योगिक नीति 1956

3)    तृतीय औद्योगिक नीति 1977 Inflation

4)    चतुर्थ औद्योगिक नीति 1980

5)    नवीन औद्योगिक नीति 1990

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प्रथम औद्योगिक नीति 1948:

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के पष्चात् भारत ने अपनी प्रथम औद्योगिक नीति की घोषणा 6 अप्रैल 1948 को की गई।
  • यह संरक्षणवाद की नीति से संबंधित थी।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री: श्यामा प्रसाद मुखर्जी

द्वितीय औद्योगिक नीति 1956:

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री: हरेकृष्ण महताब

तृतीय औद्योगिक नीति 1977:

  • प्रथम बार कांग्रेस के अतरिक्त जनता दल ने अपनी औद्योगिक नीति बनाई।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री: ब्रज लाल वर्मा
  • यह नीति गाँधीवादी . समाजवादी विचारधारा पर आधारित थी।
  • इस नीति के अंतर्गत DIC की स्थापना की गई।
  • पूरा नाम: District Industry Center (जिला औद्योगिक केन्द्र)

चतुर्थ औद्योगिक नीति 1980:

  • कांग्रेस की सत्ता में वापस आने के साथ ही नवीन औद्योगिक नीति 1980 की घोषणा की गई।
  • यह नीति आर्थिक संघवाद की नीति पर आधारित थी।
  • 1980 से 1990 के बीच भारत आर्थिक वृध्दि नहीं कर सका इसी समय चीन एवं अन्य देश विकास की दर में आगे निकल गये।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री: तोंसे अनंत पाई

नवीन औद्योगिक नीति 1991:

  • 24 जुलाई 1991 में इस नीति की घोषणा की गई।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह
  • डॉ. मनमोहन सिंह को ही भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण का अग्रदूत कहा जाता है।
  • यह नीति LPG के सिध्दांत पर आधारित थी।

 

L : Liberalization (उदारीकरणद्ध)                                      

P : Privatization (निजीकरणद्ध)

G : Globalization (वैष्वीकरणद्ध)

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